उर्वरक जैविक खेती

कम्पोस्ट खाद कैसे बनाएं – कम्पोस्ट खाद तैयार करने के सबसे आसान तरीके!

कम्पोस्ट खाद का उपयोग आज खेती में बड़े पैमाने पर हो रहा है. कम्पोस्ट खाद जैविक पदार्थों के अपघटन एवं पुनःचक्रण से बनाई जाती है. जिसको घर में बचा सब्जी का कचरा और पशुओं के अपशिष्ट को साथ में मिलाकर तैयार किया जाता है. कम्पोस्ट खाद तीन से चार महीने में बनकर तैयार हो जाती है. कम्पोस्ट खाद को जैव कृषि का मुख्य घटक भी माना जाता है.

compost khad

कम्पोस्ट खाद का उपयोग किसान भाई हर तरह की खेती में कर रहे हैं. इसके उपयोग से पैदावार बढती है. जिससे किसान भाइयों का मुनाफा ज्यादा होता है. कम्पोस्ट खाद खेत में डालने पर ये पौधों को प्राप्त होने वाले पोषक तत्वों में उच्च जैविक उर्वरता का संचार करता है. इसके साथ ही यह भूमि में जैव अपशिष्ट को कम करता है और खेती में रोगजनक कीटों को भी ख़त्म करने का काम करता है.

कम्पोस्ट खाद को बनाने में ज्यादा मेहनत नही लगती जिस कारण किसान भाई इसे आसानी से अपने घर पर बनाकर अपने खर्च को कम कर सकते हैं. इसके उपयोग से वो अपनी फसल में लगने वाले रोगों में कमी ला सकते हैं. आज हम आपको यहाँ कम्पोस्ट खाद बनाने के तरीके और उसके फायदों के बारें में बताने वाले हैं.

कम्पोस्ट खाद बनाने के तरीके

आज कम्पोस्ट को कई तरीकों से बनाया जा रहा है. लेकिन आज हम आपको इसकी कुछ विधियों के बारें में जानकारी देने वाले हैं जिनके माध्यम से आप इसे अपने घर पर भी बना सकते हैं.

साधारण तरीका

कम्पोस्ट बनाने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है. इस तरीके से कम्पोस्ट बनाने के लिए किसान भाइयों को पहले जगह का चयन करना होता है. जिसके लिए छायादार जगह का होना जरूरी हैं. साथ ही उस जगह पर हवा और सूर्य का प्रकाश कम मात्रा में पहुँचता हो. क्योंकि इसको बनाते टाइम इसे हवा और धुप से बचाकर रखा जाता है.

कम्पोस्ट तैयार करने का तरीका

जगह के चयन के बाद उस जगह पर अपने अपशिष्ट के अनुसार गड्डा तैयार कर लें. जिसके बाद तैयार किये हुए गड्डे में हल्का पानी का छिडकाव कर दें. और गड्डे में सबसे पहले कुछ दिन पुराना सूखा पशुओं का गोबर डाल दें. ध्यान रहे कभी भी ताज़ा गोबर का इस्तेमाल इसमें ना करें क्योंकि ताज़ा गोबर इसके लिए उपयुक्त नही होता है.

गोबर की पहली परत बनाने के बाद उसमें सुखी नीम की पत्तियां डाल दें. नीम की पत्तियों में नाईट्रोजन की मात्रा ज्यादा पाई जाती हैं. सूखी नीम की पत्तियां डालने के बाद उसमें तीसरी परत के रूप में कुछ गीले अपशिष्ट दाल दें. इस तरह सूखे और गीले अपशिष्ट की चार से पांच परत बना दें.

गीले अपशिष्ट के रूप में हम सब्जियों का वेस्ट, पेड की काटी गई गीली शाखाओं और हरी घास का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इन सबको गड्डे में एक परत के रूप में डालकर अच्छे से दबा दें. जिससे गड्डे में कही पर भी कोई जगह ना बच पाए. इसके बाद उसमें हलकी मात्र में पानी डाल दें. लास्ट में सबसे ऊपर फिर से गोबर की परत बना दें.

गोबर की बनाई हुई लास्ट परत पर 15 सेंटीमीटर मोटी मिट्टी की परत बनाकर उसे ढक दें. और मिट्टी की परत को पानी से गीला कर दें. जिसके बाद उसे 3 महीने के लिए छोड़ दें. तीन महीने बाद कम्पोस्ट बनकर तैयार हो जाता हैं. जिसको किसान भाई अपने खेत में फसल बोने से पहले छिडक दें जिसके बाद उसे हल से खेत की मिट्टी में अच्छे से मिला दें.

बिना गड्डे खोदे कम्पोस्ट तैयार करने की विधि

इस विधि के माध्यम से हम बिना गड्डा खोदे ही कम्पोस्ट खाद बना सकते हैं. इसके लिए भी पहले हमें जगह का चयन करना होगा. उसके बाद वहां पर मौजूद खरपतवार को हटाकर जगह को बिलकुल साफ़ कर लें. उस पर मिट्टी की एक इंच मोटी दीवार बनाए. इसके बनाने के बाद उसमें खेतों की अपशिष्ट डाल दें उसके बाद पहले की तरह ही परत दर परत सूखे और गिले कचरें को उस पर डालें. सारे डाले हुए अपशिष्ट को हल्का पानी से भीगो दें. लास्ट में सारे कचरे को किसी खराब कपड़े की सहायता से ढक दे.

फिर उसे लगभग 10 दिन बाद फिर से मिक्स कर दे. लेकिन इस बार मिक्स करने के बाद उसे और भी अच्छे से ढक दें ताकि उसमें हवा या धुप दोनों ना जा पायें. इस मिक्स हुए खाद को दो महीने के लिए ढका रहने दें. जिसके बाद जब खेत में फसल बोने का टाइम आयें तब इसको खेतों में तीन सप्ताह पहले डाल दें. जिससे भूमि को खाद के पोष्क तत्व जल्द मिल जाएँ.

कम समय में कम्पोस्ट बनाने की विधि

इस विधि के माध्यम से एक से डेढ़ महीने में कम्पोस्ट तैयार हो जाता हैं. इस विधि से कम्पोस्ट बनाने के लिए पुराना गोबर, तुड़े को छानने के बाद बचे अपशिष्ट (रणी) और सरसों की खल की आवश्यकता होती है. इस तरीके से कम्पोस्ट बनाने के लिए भी किसी भी तरह के गड्डे की आवश्यकता नही होती.

कम्पोस्ट खाद

कम्पोस्ट को बनाने के लिए सबसे पहले सरसों की खल को बिलकुल बारीक पिस लेना चाहिए. जिसके बाद बारीक़ पिसी खल को गोबर और रणी के साथ मिलकर मिक्स तैयार कर लें. इन सभी को 1:2:4 के अनुपात में मिलाकर तैयार किया जाता है. यानी एक किलो खल में 2 किलो रणी और चार किलो गोबर मिलानी चाहिए. इन सभी को अच्छे से मिलकर तैयार कर लें.

इस तैयार किये हुए मिश्रण में हल्का पानी मिलाकर फिर से मिक्स कर दें. उसके बाद सारे को इकट्ठा कर लें. इकट्ठा करने के बाद उसे कपड़ों से दबाकर रख दें. दस दिन बाद फिर से उसे बारीक़ टुकड़ों में तोड़कर अलग कर दें और उसमें हल्का पानी मिलकर फिर से इकट्ठा कर उसे फिर से कपड़े से दबा दे. जिसके लगभग एक महीने बाद कम्पोस्ट बनकर तैयार हो जाता है.

कम्पोस्ट के खेतों में डालने के लाभ

खेती में कम्पोस्ट खाद के प्रयोग से आर्थिक फायदे के साथ साथ स्वास्थ संबंधित फायदे भी मिलते हैं. जिस कारण हर किसान भाई को कम्पोस्ट खाद का इस्तेमाल करना चाहिए. अब हम आपको इसके इस्तेमाल से होने वाले फायदों के बारें में बताने वाले हैं.

इसका पहला फायदा है कि इसे किसान भाई अपने घर पर बना सकते हैं. जिसके लिए बाज़ार से उन्हें किसी चीज़ को खरीदने की जरूरत नही पड़ती. इसे केवल घर और खेती से बचे अपशिष्ट से बनाकर तैयार किया जाता है. इसे अपने घर तैयार करने से किसान भाई को इसे बाज़ार से खरीदना नही पड़ेगा.

इसके इस्तेमाल से फसल ज्यादा पैदावार देती हैं. क्योंकि इससे पौधे को पोषक तत्व तुरंत मिलते हैं. जिससे पौधा तेज़ी से विकास करता हैं और ज्यादा पैदावार देता हैं.
इसके इस्तेमाल से भूमि की उर्वरक क्षमता पर कोई प्रभाव नही पड़ता. जिससे किसान अपने खेत में एक ही तरह की पैदावार कई बार कर अच्छी कमाई कर सकता है.
आज किसान अच्छी पैदावार लेने के लिए कई तरह के रसायनों का इस्तेमाल कर रहा है. जिससे किसान को आर्थिक परेशानी तो होती ही है. साथ में पर्यावरण भी प्रदूषित होता जा रहा है. लेकिन इसके इस्तेमाल करने से पर्यावरण प्रदूषण का ख़तरा भी काफी कम हो जाता है.

इसके इस्तेमाल से स्वास्थ संबंधित कई परेशानियों से छुटकारा मिलता हैं. दरअसल किसान भाई आज अच्छी पैदावार लेने के लिए खेतों में कई तरह के उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं. जो कई तरह के रसायनों से बने होते हैं. जिनमें कुछ रसायन ऐसे होते हैं जो नष्ट ना होने की वजह से फसल के साथ साथ मनुष्य के शरीर तक पहुँच जाता है. जिस कारण आज कई तरह की अलग अलग बीमारियाँ मनुष्य के शरीर में हो रही हैं.

आज साधारण विधि का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जा रहा है. लेकिन आप इसे अपनी जरूरत के हिसाब से किसी भी विधि से तैयार कर सकते हैं. इसके साथ ही आप इसका उत्पादन व्यापारिक रूप से भी कर सकते हैं. इसे बनाकर आप और किसानों को बेच सकते हैं. जिससे आप ज्यादा मुनाफा भी कमा सकते हैं. इसको आप ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी भी तरीके से बेच सकते हैं.

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