उर्वरक असली है या नकली, बिना मशीन के ऐसे करें पहचान

किसान भाई अपने खेत से अच्छी उपज लेने के लिए कई तरह के उर्वरकों का इस्तेमाल करता है. आज दुनियाभर में काफी कंपनियाँ है जो रासायनिक उर्वरकों का निर्माण कर रही है. लेकिन मांग और आपूर्ति के अभाव के काफी बार खराब गुणवत्ता और नकली माल भी बाजार में देखने को मिलता है. जिसका बाजार भाव तो असली उर्वरक के सामान होता है. लेकिन यह पौधों के विकास के लिए लाभकारी नही होता है. जिससे किसान भाई को उर्वरक की खरीद पर तो आर्थिक हानि उठानी पड़ती ही है साथ में फसल में भी नुक्सान देखने को मिलता है.

उर्वरक असली है या नकली, बिना मशीन के ऐसे करें पहचान

आज हम आपको उर्वरकों के असली और नकली होने के बारें में बताने वाले हैं. जिनकी पहचान किसान भाई सामान्य तौर पर कर सकता है.

उर्वरकों में मुख्य रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की मात्रा पाई जाती हैं. जो पौधों के विकास में सहायक के रूप में काम करती हैं. इनकी एक उचित मात्र की जरूरत ही पौधों को होती है. इस मात्रा से कम या ज्यादा इस्तेमाल करने पर पौधों का विकास प्रभावित होता है.

डी.ए.पी.

डी.ए.पी. का पूरा नाम डाई अमोनियम फास्फेट है. जो पौधों की रोपाई से पहले भूमि में दिया जाता हैं. यह भूमि में नमी बनता हैं और दानों के अंकुरण में सहायक होता है. जिसे साधारण रूप में देखकर ही उसकी पहचान आसानी से की जा सकती हैं. यह पानी में पूर्ण रूप से घुलनशील नही होता है.

  1. डी.ए.पी. खाद कठोर और काले रंग का दिखाई देता है. जो हाथों पर लगने के बाद आसानी से नही छूटता.
  2. खाद को मुठ्ठी में भीचकर उसमें मुहँ से हवा देने पर खाद पसीज जाता हैं और पिघलता हुआ दिखाई देता हैं.
  3. डी.ए.पी. के दानो को गर्म तवे पर डालने पर वो फूल कर फैल जाते हैं.
  4. इनके अलावा खाद में तम्बाकू का चुना मिलाकर रगड़ने पर उसमें से तेज़ गंध आती है. जो सूघने में बिलकुल असहनीय होती हैं.

यूरिया

यूरिया खाद का इस्तेमाल पौधों के विकास के दौरान किया जाता है. इसमें नाइट्रोजन की मात्रा पाई जाती है. इसका इस्तेमाल पौधे की पत्तियों के पीली दिखाई देने और विकास रुकने के दौरान किया जाता है. इसका अधिक इस्तेमाल फसल को ख़राब कर सकता है. इसके असली और नकली होने की पहचान करना काफी आसान होता हैं.

  1. यूरिया खाद का रंग सफ़ेद और गोल दिखाई देता हैं. जिसका आकार मोटा और पतला, चमकीला दिखाई देता है.
  2. यूरिया खाद पानी में पूरी तरह घुलनशील होता है. इसको पानी में घोलने पर पानी ठंडा हो जाता हैं.
  3. इसके अलावा यूरिया को आँच में डालने पर वो पूरी तरह नष्ट हो जाता हैं.

सिंगल सुपर फास्फेट

सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) डी.ए.पी. की तरह कठोर और दानेदार होता है. जिसका रंग भूरा काला होता है. कठोर दाने के अलावा यह चूर्ण के रूप में भी पाया जाता है. सिंगल सुपर फास्फेट का इस्तेमाल डी.ए.पी. के साथ मिलावट के रूप में सबसे ज्यादा किया जाता है. इसका इस्तेमाल बीज रोपाई और पौधे पर फल, फूलों के बनने के दौरान किया जाता है. इसकी पहचान किसान भाई साधारण रूप से आसानी से कर सकता है.

  1. सिंगल सुपर फास्फेट का रंग डी.ए.पी. से हल्का काला होता है.
  2. इसके दानो को गर्म तवे पर डालने के बाद इसके दाने फूलते नही हैं.

NPK

NPK का नाम इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम के आधार पर रखा गया है. इसका इस्तेमाल फसल की रोपाई से पहले किया जाता हैं. इसके अंदर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम तीनों मुख्य पोषक तत्व पाए जाते हैं. जो पौधे के अंकुरण और उसके विकास के साथ साथ उपज की गुणवत्ता के लिए बेहतर होते हैं. इसका ज्यादातर इस्तेमाल दाने वाली फसलों में किया जाता है. NPK की पहचान करना काफी आसान होता है.

  1. NPK यूरिया की तरफ सफ़ेद दानेदार दिखाई देता हैं. लेकिन इसके दानो में चमक नही होती.
  2. इसको पानी में डालने पर यह पूर्ण रूप से पानी में घुल जाता है.
  3. इसको पानी में घोलने पर पानी ठंडा हो जाता है.
  4. इसके दानो को गर्म तवे पर रखने से वो पिंघलकर द्रव्य में बदल जाते हैं. और अधिक गर्म करने पर वाष्प में बदल जाता हैं.

पोटाश

पोटाश का इस्तेमाल पौधों के विकास के दौरान उन्हें प्राकृतिक आपदा सुखा और ठंड से बचाता है. इसके अलावा यह पौधों के विकास के साथ साथ फसल की गुणवत्ता बढ़ाने में बहुत सहायक होता है. यह पौधों की जड़ों को मज़बूती प्रदान करता है. इसकी भी पहचान आसानी से की जा सकती हैं.

  1. पोटाश नमक और मिर्च के मिश्रण की तरह दिखाई देता हैं. जिसके रणे आपस में मिलाने के बाद भी अलग अलग रहते हैं.
  2. पोटाश को पानी के घोल में डालने के बाद उसके लाल दाने पानी की सतह पर तैरने लगते हैं.

जिंक सल्फेट

जिंक सल्फेट का इस्तेमाल पौधों के विकास के दौरान किया जाता है. यह पौधों के विकास में सहायक होता हैं. इसके अलावा यह दानो के आकार को भी बढ़ा देता है. जिससे फसल का उत्पादन अच्छा मिलता है. इसके असली और नकली होने की पहचान करना काफी कठिन होता है. क्योंकि इसकी मिलावट मैग्नीशियम सल्फेट के साथ की जाती है. और दोनों का रंग सफ़ेद होता है. और आकार बारीक़ दानेदार होता है.

  1. इसकी पहचान के लिए यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है. जिंक सल्फेट को अगर यूरिया के साथ मिला दिया जाता है. तो दोनों बहुत जल्द पिंघल जाते हैं जिसका रंग हल्का मटमैला दिखाई देता हैं.
  2. अगर जिंक सल्फेट में डी.ए.पी. को मिला दिया जाए तो थक्केदार घना अवशेष बन जाता है. जबकि मैग्नीशियम सल्फेट के साथ ऐसा अवशेष नही बनता.

तो ये कुछ प्रमुख उर्वरक हैं जिनकी पहचाना आसानी से की किसान भाई बिना किसी खर्च के कर सकता हैं.

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