योजना

मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना – Soil Health Card Scheme

भारत हमेशा से कृषि प्रधान देश रहा है. भारत की अर्थव्यवस्था में खेती का एक ख़ास स्थान है. लेकिन यहाँ के किसानों की आर्थिक स्थिति के बारें में भी आज सभी अच्छे से वाकिफ हैं. आज हर दिन आर्थिक रूप से परेशान किसान आत्महत्या करने में लगे हैं. जिसको देखते हुए सरकार द्वारा कई ऐसे कदम उठाये गए हैं. जिनके माध्यम से किसान भाईयों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सरकार की तरफ से लाभ मिल रहा है. उन्ही में से सॉइल हेल्थ कार्ड ( मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड) योजना भी सरकार द्वारा किसान भाइयों के लिए लाई गई एक योजना है. जिसके बारें में आज हम आपको जानकारी देने वाले हैं.

सॉइल हेल्थ कार्ड योजना

सॉइल हेल्थ कार्ड योजना क्या है ?

सॉइल हेल्थ कार्ड योजना भारत सरकार द्वारा किसानों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ देने के लिए लाई गई एक योजना है. जिसका क्रियान्वयन राज्य और केंद्र सरकार के कृषि विभागों के माध्यम से किया जाता है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य हर किसान को उसके खेत की मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति के बारें में जानकारी देना और मिट्टी की स्थिति में सुधार के संबंध में सलाह देना है. ताकि मिट्टी की उर्वरक क्षमता को लगातार बनाए रखा जा सके.

सॉइल हेल्थ कार्ड योजना की शुरुआत फरवरी 2015 में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई थी. इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा किसान भाइयों को खेती की मिट्टी जांच के लिए एक कार्ड जारी किया जाता है. जिसमें किसान भाइयों के खेत की मिट्टी के बारें में सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई जाती है. इस जानकारी के माध्यम से किसान भाई उपयुक्त फसल को उगाकर अच्छा लाभ कमा सकता है.

सॉइल हेल्थ कार्ड योजना का लाभ किसान भाइयों को अप्रत्यक्ष रूप से मिलता हैं. सॉइल हेल्थ कार्ड के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर किसान भाई अपने खेतों में उचित मात्रा में पोषक तत्व डालकर मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ा सकते हैं. और उर्वरकों के अधिक दोहन को कम कर भूमि की उपजाऊ क्षमता में भी वृद्धि कर सकते है. इस योजना के लिए सरकार की तरफ से 14 करोड़ किसानों को कार्ड देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

सॉइल हेल्थ कार्ड योजना के उद्देश्य ?

  1. इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसान भाइयों को उनकी खेत की मिट्टी के बारें में उचित जानकारी देना है. ताकि किसान भाइयों के खेत की उपज बढ़ सके.
  2. उर्वरक के अत्यधिक दोहन को कम कर उर्वरकों पर होने वाले खर्च को कम कर किसानों की आय को बढ़ाना.
  3. भूमि की उर्वरक क्षमता को बढ़ाकर फसल के उत्पादन को बढ़ाना.
  4. किसानों की आर्थिक स्थिति में परिवर्तन लाकर उनको आत्मनिर्भर बनाना.

सॉइल हेल्थ कार्ड योजना के लिए कैसे अप्लाई करें ?

सॉइल हेल्थ कार्ड योजना का लाभ लेने के लिए किसान भाई को सरकारी वबसाईट पर जाकर अपना पंजिकरण करना होता है. इसके लिए सरकार द्वारा https://soilhealth.dac.gov.in/ नामक वेबसाईट शुरू की गई है. जिसके लॉग इन पैनल पर जाकर किसान भाई अपना रजिस्ट्रेशन नए उपभोगता के तौर पर करवा दें. जिसके बाद उन्हें उनका यूजर नाम और पासवर्ड मिला जाएगा. जिसके बाद खुद का अकाउंट खोलने पर

  1. सॉयल नमूनों का पंजीकरण
  2. सॉयल परिक्षण प्रयोगशालाओं में नमूनों का परिक्षण
  3. सॉयल टेस्ट क्रॉप रिस्पॉस (एसटीसीआर) समीकरण पर आधारित उर्वरक सिफारिशें
  4. एमआईएस रिपोर्ट

चार ऑप्शन दिखाई देते हैं. अपनी जानकारी के आधार पर किसान भाई किसी भी एक ऑप्शन को सलेक्ट कर अपनी खेत की जानकारी हासिल कर सकते हैं. इसके अलावा अपने कार्ड के बारें में और भी किसी भी तरह की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

सॉइल हेल्थ कार्ड योजना किस तरह काम करती है ?

इस योजना में पंजीकरण कराने के बाद मिट्टी की जांच के लिए कृषि विभाग से जुड़े अधिकारी खेत के चारों कोने से मिट्टी का सैंपल एकत्रित कर उसे जांच के लिए लेबोरेटरी में भेजते हैं. लेबोरेटरी में मौजूद मिट्टी विशेषज्ञ मिट्टी की जांच कर उसकी रिपोर्ट तैयार करते हैं. इस रिपोर्ट को संबंधीत किसान की जानकारी के साथ वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है. जिससे किसान भाइयों को उनके खेत की मिट्टी के बारें में सम्पूर्ण जानकारी मिल जाती है. इसके अलावा संबंधित विभाग द्वारा रिपोर्ट की जानकारी मोबाइल फोन पर संदेश भेजकर भी दी जाती है.

कौन कौन इस योजना का लाभ उठा सकते हैं ?

इस योजना का लाभ जमीन रखने वाले सभी किसान भाई उठा सकते हैं. इस योजना के माध्यम से एक खेत के लिए कार्ड एक बार ही बनता है. जो तीन साल तक वेध होता है. यानी एक बार एक खेत की मिट्टी की जांच कराने के बाद तीन साल बाद किसान भाई उसकी जांच फिर से करा पायेंगे.

सॉइल हेल्थ कार्ड योजना के लाभ

किसान भाइयों के लिए इस योजना के लाभ अप्रत्यक्ष रूप से दिखाई देते हैं.

  1. इस योजना में मिट्टी की जांच कराकर किसान भाई मिट्टी के लिए उपयुक्त फसल उगा पायेगा. जिससे फसल की पैदावार भी अच्छी मिलती हैं.
  2. मिट्टी जांच के आधार पर उर्वरक की उचित मात्रा का इस्तेमाल करने से उर्वरक पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से किसान भाई बच जाता है.
  3. मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ने से हर साल फसल की पैदावार अधिक मिलेगी. और भूमि का उपजाउपन बना रहेगा.
  4. इस योजना से खेत की मिट्टी की स्थिति का पता लगाकर खेती के लिए अनुपयोगी हो चुकी भूमि में उचित पोषक तत्व देकर उपजाऊ बनाया जा सकेगा.
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