उन्नत किस्में

गेहूं की उन्नत किस्में और उनकी बुआई का समय

गेहूँ, चावल के बाद सबसे ज्यादा खाई जाने वाली मुख्य अनाज फसल हैं. भारत में इसकी खेती रबी की फसल के साथ की जाती है. इसके पौधों को विकास करने के लिए पानी की ज्यादा जरूरत होती है. भारत में गेहूँ को सबसे ज्यादा उत्तर भारत के राज्यों में उगाया जाता है. गेहूँ के इस्तेमाल से कई तरह की खाने की चीज़े बनती है. जिनमें ब्रेड, बिस्कुट, टॉस जैसी और भी काफी चीजें बनती है.

गेहूँ की उन्नत किस्में

गेहूँ की उन्नत खेती कर किसान भाई अच्छा लाभ कम सकते हैं. क्योंकि बाकी फसलों की आपेक्षा इसकी पैदावार ज्यादा प्राप्त होती है. एक हेक्टेयर में इसकी औसतन पैदावर लगभग 40 क्विंटल तक हो सकती है. अधिक पैदावार लेने के लिए फसल की अच्छी देखभाल के साथ साथ अच्छे बीजों का चयन करना भी ज्यादा जरुरी है. अच्छे बीज उगाने पर ही ज्यादा पैदावार मिलती है.

आज हम आपको गेहूँ के बीजों की इन्ही उन्नत किस्मों के बारें में बताने वाले हैं.

बाज़ार में आज गेहूँ की बहुत सारी किस्में मौजूद हैं. इन सभी किस्मों को उनके वातावरण के हिसाब से उगाकर ही अच्छी पैदावार ली जा सकती हैं.

एच. डब्लू.- 2045

गेहूँ की ये किस्म सिंचित जगहों के लिए तैयार की गई है. इस किस्म के पौधों को पानी की ज्यादा जरूरत होती है. इसके पौधे बीज रोपाई के लगभग 115 से 120 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं. इसके पौधों की लम्बाई 3 फिट से ज्यादा पाई जाती है. इसके पौधों पर आने वाली बाली सामान्य लम्बाई की होती है. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 45 से 50 क्विंटल तक हो सकता है. गेहूँ की इस किस्म पर रतुआ और झुलसा रोग नही लगता.

राजलक्ष्मी

गेहूँ की इस किस्म को उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में ज्यादा उगाया जाता है. इस किस्म के पौधों की लम्बाई तीन फिट के आसपास पाई जाती है. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 35 से 45 क्विंटल तक हो सकता है. गेहूँ की इस किस्म को कुछ जगहों पर एच.पी.- 1731 के नाम से भी जाना जाता है. इसके पौधे बीज रोपाई के लगभग 130 से 140 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं.

के 8027 ( मगहर )

गेहूँ की इस किस्म को सिंचाई की काफी कम जरूरत होती है. इस कारण इसे असिंचित जगहों में ज्यादा उगाया जाता है. इस किस्म के पौधों की लम्बाई 100 सेंटीमीटर के आसपास पाई जाती है. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 30 से 40 क्विंटल तक पाया जाता है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के 135 से 140 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं.

लोक 1

गेहूँ की इस किस्म को ऊसरीली भूमि में उगाने के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के 125 से 135 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. इसके पौधों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 30 से 40 क्विंटल तक पाया जाता है. इस किस्म के दानो का इस्तेमाल ब्रेड और चपाती के लिए सबसे उपयोगी होता है. इस किस्म के पौधे 90 से 100 सेंटीमीटर की उंचाई के होते हैं.

नरेन्द्र गेहूँ 1076

गेहूँ की ये एक पछेती किस्म हैं. जिसको सिंचित जगहों पर देरी से उगाने के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 100 से 115 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. इस किस्म के पौधे लगभग तीन फिट की लम्बाई के होते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 35 से 40 क्विंटल तक पाया जाता है.

एच डब्लू 2045

उन्नत किस्म

गेहूँ की इस किस्म को सिंचित जगहों पर उगाने के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 120 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 40 से 45 क्विंटल तक पाया जाता है. इस किस्म के पौधों में झुलसा रोग देखने को नही मिलता. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 90 से 100 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं.

डी वी डब्लू 14

गेहूँ की ये एक शीघ्र पकने वाली किस्म है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 105 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. इस किस्म के पौधों की लम्बाई ढाई से तीन फिट तक पाई जाती है. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 40 से 45 क्विंटल तक पाया जाता है.

के. – 8434 ( प्रसाद )

गेहूँ की इस किस्म को ऊसरीली भूमि में उगाने के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पढ़े ढाई से तीन फिट की लम्बाई के होते हैं. जिनको पकने में 136 से 140 दिन का वक्त लगता हैं. इस किस्म के पौधों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 25 क्विंटल तक पाया जाता है.

के 9465 ( गोमती )

गेहूँ की इस किस्म को असिंचित जगहों पर उगाया जाता है. जिसके पौधों को सिंचाई की काफी कम जरूरत होती है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 90 से 100 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 30 से 35 क्विंटल तक पाया जाता है. इस किस्म के पौधों की लम्बाई तीन फिट के आसपास पाई जाती है.

एच डी आर 77

गेहूँ की इस किस्म को असिंचित जगहों पर समय पर बुवाई के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 110 से 115 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 35 क्विंटल के आसपास पाया जाता है. इस किस्म के पौधों की लम्बाई तीन फिट के आसपास पाई जाती है.

के आर एल 1-4

गेहूँ की इस किस्म को ऊसरीली भूमि में उगाने के लिए तैयार किया गया है. इसके पौधों को सिंचाई की सामान्य जरूरत होती है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 130 से 140 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 45 से 50 क्विंटल तक पाया जाता हैं. इस किस्म के पौधों की लम्बाई तीन फिट के आसपास पाई जाती है.

के 8962 ( इन्द्रा )

गेहूँ की इस किस्म को लम सिंचाई वाली जगहों के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 90 से 100 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 30 से 5 क्विंटल तक पाया जाता है. इसके पौधों की लम्बाई 90 से 95 सेंटीमीटर तक पाई जाती है.

के 9107 (देवा)

इस किस्म के पौधों को सिंचित जगहों पर समय से बुवाई के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधों को रतुआ झुलसा और करनाल बंट का रोग नही लगता. इस किस्म के पौधों की लम्बाई साढ़े तीन से चार फिट तक पाई जाती है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के 130 से 140 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 45 से 50 क्विंटल तक पाया जाता है.

डी एल 784-3 (वैशाली)

गेहूँ की इस किस्म को भी सिंचित जगहों पर समय से बुवाई के लिए तैयार किया गया है. इसके पैधों की लम्बाई तीन फिट के आसपास पाई जाती है. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 40 से 50 क्विंटल तक पाया जाता है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 130 से 140 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं.

सोनाली एच पी 1633

गेहूँ की ये एक पछेती किस्म है. जिसको सिंचित जगहों पर देरी से बुवाई के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधों की लम्बाई चार फिट के आसपास पाई जाती है. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 35 से 40 क्विंटल तक पाया जाता है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 120 से 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं.

पी बी डब्ल्यू 373

उन्नत किस्म

गेहूँ की इस किस्म को उत्तर भारत में ज्यादा उगाया जाता है. इस किस्म के पौधों की लम्बाई 3 फिट के आसपास पाई जाती है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के बाद लगभग 120 से 135 दिन में पककर तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 40 से 45 क्विंटल तक पाया जाता है.

यूपी 2425

गेहूँ की इस किस्म को उत्तर प्रदेश में अधिक उगाया जाता जाता है. जिसको सिंचित जगहों पर देरी से बुवाई के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के 126 से 134 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 36 से 40 क्विंटल तक पाया जाता है. इस किस्म के पौधे तीन फिट के आसपास पाए जाते हैं.

एच. पी. 1744

गेहूँ की इस किस्म को सिंचित जगहों पर देरी से बुवाई के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के 120 से 130 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 36 से 40 क्विंटल तक पाया जाता है. इस किस्म के पौधों की लम्बाई तीन फिट के आसपास पाई जाती हैं.

एच डी 2643

गेहूँ की इस किस्म को गंगा के नाम से भी जाना जाता है. जिसको उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सिंचित जगहों पर उगाया जाता है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 120 से 130 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 36 से 40 क्विंटल तक पाया जाता है. इस किस्म के पौधों की लम्बाई तीन फिट के आसपास पाई जाती हैं. इस किस्म के पौधों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 35 से 45 क्विंटल तक पाया जाता है.

नरेन्द्र गेहूँ 2036

गेहूँ की इस किस्म को सिंचित जगहों पर देरी से बुवाई के लिए तैयार किया है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 110 से 115 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. इसके पौधों की लम्बाई 80 से 85 सेंटीमीटर तक पाई जाती है. इस किस्म के पौधों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 40 से 45 क्विंटल तक पाया जाता है. इस किस्म के पौधों को रतुआ रोग नही लगता है.

के. – 9644

गेहूँ की इस किस्म को असिंचित जगहों के लिए तैयार किया गया है. जिसके पौधे तीन से चार फिट की लम्बाई के पाए जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 35 से 40 क्विंटल तक पाया जाता है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के 100 से 110 दिनन बाद पककर तैयार हो जाते हैं.

पी बी डब्लू 373

गेहूँ की इस किस्म को सिंचित जगहों पर देरी से बुवाई के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के 120 से 135 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 35 से 45 क्विंटल तक पाया जाता है. इसके पौधों की लम्बाई तीन फिट के आसपास पाई जाती है.

उजियार के 9006

गेहूँ की इस किस्म के पौधे सिंचित जगहों में अधिक पैदावार देने के लिए जाने जाते हैं. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 125 से 135 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 55 क्विंटल के आसपास पाया जाता है. इसके पौधों की लम्बाई चार फिट के आसपास पाई जाती है. इसके दानो का आकार सामान्य होता है.

एच पी 1633

गेहूँ की इस किस्म को सोनाली के नाम से भी जाना जाता है. इस किस्म को सिंचित भागों में देरी से उगाने के लिए जाना जाता है. इसके पौधे चार फिट लम्बे पाए जाते हैं. जिन पर बनने वाली बाली का आकार छोटा होते है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 115 से 120 दिन में पककर तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 35 से 40 क्विंटल तक पाया जाता है.

एच. पी. 1744

गेहूँ की इस किस्म के पौधे सिंचित जगहों में पछेती पैदावार के लिए तैयार किये गए हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 35 से 45 क्विंटल तक पाया जाता है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 120 से 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं. इस किस्म के दानो का आकार्ट सामन्य होता है. और इसके पौधे लगभग 80 सेंटीमीटर लम्बाई के होते हैं.

महिको गोल गेहूँ

उन्नत किस्म

गेहूँ की इस किस्म को उत्तर भारत के सभी मैदानी भागों में उगाया जाता है. इसके पौधे बीज रोपाई के लगभग 135 से 140 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं. इसके एक पौधे में 20 किल्ले और एक बाल मे 90-95 दाने पाए जाते हैं. इसके पौधे तीन फिट के आसपास लम्बाई के होते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 50 क्विंटल से ज्यादा पाया जाता है.

एच. आई. – 8663 (पोषण)

गेहूँ की इस कसिम के पौधे बीज रोपाई के लगभग 120 से 130 दिन बाद कटाई के लिएय तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 50 से 55 क्विंटल तक पाया जाता है. इसके पौधे तीन फिट से ज्यादा लम्बाई के होते हैं. जो गर्मी के मौसम को भी सहन कर सकते हैं. इसके दाने उच्च गुणवत्ता के होते हैं.

पूसा तेजस

गेहूँ की इस किस्म को मध्य भारत में ज्यादा उगाया जाता है. इस किस्म के पौधों को सिंचाई की ज्यादा जरूरत नही होती. इस किस्म के दानो का इस्तेमाल पास्ता, नूडल्स और मैक्रोनी जैसी चीजों को बनाने में किया जाता है. इस किस्म के पौधों को अधिक उत्पादन देने के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 55 से 75 क्विंटल तक पाया जाता है.

जे-डब्ल्यू 3336

इस किस्म के पौधों को सिंचाई की काफी का जरूरत होती है. इस कारण इसे असिंचित जगहों पर भी उगाया जा सकता है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 110 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 50 से 60 क्विंटल तक पाया जाता है. इस किस्म के पौधों में जींक की मात्रा काफी ज्यादा पाई जाती है.

पूसा उजाला

गेहूँ की इस किस्म को सिंचित और असिंचित दोनों जगहों पर उगा सकते हैं. गेहूँ की इस किस्म का निर्माण आई. ए. आर. आई. इंदौर ने किया है. इस किस्म के के पौधों का प्रति हेक्टेयर उतपादन सिंचित और असिंचित क्षेत्रों के आधार पर 30 से 75 क्विंटल तक पाया जाता है. इसके पौधे सामान्य लम्बाई के होते हैं.

एच. डी. 2967

गेहूँ की इस किस्म को हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अधिक उगाया जाता है. इस किस्म के पौधों को सिंचाई की भी ज्यादा जरूरत नही होती. इस किस्म की पैदावार अगेती फसल के रूप में की जाती है. इस किस्म का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 50 से 60 क्विंटल के आसपास पाया जाता है. इस किस्म के पौधे सामान्य लम्बाई के पाए जाते हैं. इस किस्म के पौधों पर पीला रतुआ का रोग भी कम देखने को मिलता है.

एच. डी. – 2888

गेहूँ की ये एक पछेती किस्म है. जिसको असिंचित जगहों पर देरी से उगाने के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के 120 से 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते है. जिनकी लम्बाई तीन फिट के आसपास पाई जाती है. इस किस्म के पौधों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 30 से 40 क्विंटल तक पाया जाता है. इसक किस्म एक पौधों में रतुआ रोग देखने को नही मिलता.

के. – 307

गेहूँ की इस किस्म के पौधे सिंचित जगहों में अधिक पैदावार देने के लिए तैयार किया गए हैं. गेहूँ की इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 120 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं. इसके पौधों की लम्बाई तीन फिट के आसपास पाई जाती है. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 60 क्विंटल के आसपास पाया जाता है.

एच. यू. डब्लू. – 468

गेहूँ की इस किस्म को सिंचित क्षेत्रों में समय पर रोपाई के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के लगभग 130 से 140 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 55 क्विंटल के आसपास पाया जाता है. इसके पौधों की लम्बाई तीन फिट के आसपास पाई जाती है.

क्षेत्र और  बुआई का समय

क्षेत्रबुवाई का समयकिस्में
सिंचित (समय पर बुवाई)नवम्बर माह के प्रथम सप्ताह से आखिरी सप्ताह तकदेवा के 9107, एचयूडब्लू 510, यूपी 2382, पी बी डब्लू 443, पी बी डब्लू 343, एच पी 1731, राजश्य लक्ष्मी, नरेन्द्र गेहूँ 1012, उजियार के 9006, डी एल 784-3, (वैशाली), एच डी2888, एच डी 2967,एचयूडब्लू468, एच डी 2824
सिंचित (समय से देरी से बुवाई)नवम्बर माह से दिसम्बर माह के आखिरी तकत्रिवेणी के 8020, के 9533, नरेन्द्र गेहूँ 2036, एच डी 2643, गंगा, डी वी डब्लू 14, नरेन्द्र गेहूँ1076, यूपी 2425, के 9423, पी बी डब्लू 16, के 9903, एच डब्लू 2045, एचपी 1744, नरेन्द्र गेहूँ1014, सोनाली एच पी 1633, के 9162, बी डब्लू 373,
असिंचितअक्टूबर माह के आखरी सप्ताह से मध्य नवम्बरमन्दाकिनी के 9251, गोमती के 9465, मगहर के 8027, इन्द्रा के 8962, के 9644, एच डी आर 77
उसर भूमिअक्टूबर से मध्य नवम्बरके आर एल 19, के आर एल 1-4, प्रसाद के 8434, लोक 1, एन डब्लू 1067

 

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