बादाम की खेती कैसे करें – पूरी जानकारी!

बादाम की खेती मेवा फल के रूप में की जाती है. इसके फल को एक बहुत ही ताकतवर और ज्ञान वर्धक फल माना जाता है. इसका उपयोग खाने में कई तरह से किया जाता है. बादाम के फल को खाने के अलावा व्यापारिक रूप से भी उपयोगी माना जाता है. बादाम के बीजों से तेल निकाला जाता है. जिसको खाने और आयुर्वेदिक दवाइयों के उपयोग में लिया जाता है. बादाम खाने से कई तरह बीमारीयों से छुटकारा मिलता है.

बादाम की पैदावार

बादाम का पेड़ एक बार लगाने के बाद लगभग 50 साल तक पैदावार देता है. इसका पेड़ सामान्य रूप से बाकी सभी पेड़ो की तरह दिखाई देता है. जिस पर सुगंधित सफ़ेद और गुलाबी फूल खिलते हैं. बादाम की खेती के लिए आद्र उष्णकटिबंधीय जलवायु को उपयुक्त माना जाता है. इसके पौधे को ज्यादा बारिश या ज्यादा गर्मी की आवश्यकता नही होती. इसकी खेती के भूमि का पी.एच. मान सामान्य होना चाहिए.

अगर आप भी बादाम की खेती कर अच्छा लाभ कमाना चाहते हैं तो आज हम आपको इसकी खेती के बारें में सम्पूर्ण जानकारी देने वाले हैं.

उपयुक्त मिट्टी

बादाम की खेती के लिए कार्बनिक पदार्थों से भरपूर उचित जल निकासी वाली उपजाऊ भूमि अच्छी होती है. जबकि इसकी खेती जल भराव वाली जमीन में नही की जा सकती. क्योंकि जल भराव वाली भूमि में पैदावार कम होती है और पौधे में रोग लगने की संभावना भी बढ़ जाती है. इसकी खेती के लिए जमीन का पी.एच. मान 5 से 8 के बीच होना चाहिए.

जलवायु और तापमान

बादाम की खेती के लिए आद्र उष्णकटिबंधीय जलवायु की आवश्यकता होती है. भारत में बादाम को ठंडी जगहों पर उगाया जाता है. बादाम के पेड़ को कश्मीर का राज्य पेड़ माना जाता है. इसके पौधे और फल दोनों ही ठंडी जलवायु में अच्छे से विकास करते हैं. लेकिन सर्दियों में इसके पौधे को बचाकर रखा जाता है. सर्दियों में पड़ने वाली धुंध और पाला इसके पौधे और फलों के लिए नुकसानदायक होता है. इसके पौधों के लिए सालभर में 80 से 100 सेंटीमीटर वर्षा काफी होती है. अधिक समय तक पड़ने वाली तेज़ ठंड और तेज़ गर्मी से इसकी पैदावार को नुक्सान पहुँचाती है.

बादाम के पौधे को अंकुरित होने के लिए 20 डिग्री के आसपास तापमान की जरूरत होती है. उसके बाद इसके पौधे को विकास करने के अधिकतम 27 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है. इसके पौधे पर फूल खिलने के दौरान कुछ समय तक -2 डिग्री तापमान को भी सहन कर सकते हैं. लेकिन ज्यादा समय तक तापमान कम रहने से फूल खराब होने लगते हैं.

उन्नत किस्में

बादाम की कई तरह की किस्में हैं. जिनको व्यापारिक रूप से अधिक पैदावार लेने के लिए तैयार किया गया है. इन सभी किस्मों को उनकी पैदावार के टाइम के हिसाब से अलग अलग श्रेणियों में रखा गया है.

विदेशी किस्में

कैलिफोर्निया

बादाम की उन्नत किस्म

इस किस्म के बादाम को अमेरिकी बादाम के नाम से भी जाना जाता है. इस किस्म का पौधा नियमित रूप से अधिक पैदावार देता है. इसके पौधे पर बादाम अन्य किस्मों से पहले पकना शुरू हो जाते हैं. इसकी गुठली से प्राप्त होने वाली बादाम गिरी का स्वाद मीठा होता है. और गुणवत्ता भी अच्छी होती है.

मामरा बादाम

मामरा बादाम को अफगानिस्तान में उगाया जाता हैं. इसकी पैदावार अमेरिकी बादाम से कम होती है.

अगेती किस्में

इस किस्म के बादाम सबसे पहले पककर तैयार हो जाते हैं.

नीप्लस अल्ट्रा

अगेती श्रेणी के बादाम की इस किस्म को ज्यादा पैदावार देने के लिए उगाया जाता है. लेकिन इसके पौधे पर पाले का प्रभाव अधिक देखने को मिलता है, जिससे इसकी पैदावार में भी फर्क देखने को मिलता है. अगर पाले से इसके पौधे को बचा लिया जाए तो इसकी पैदावार बहुत ज्यादा होती है. इसके पौधे नॉन पेरिल प्रजाति के लिए परागकर्ता का काम भी करते हैं.

नॉन पेरिल

अगेती श्रेणी की किस्मों में इस किस्म को सबसे ज्यादा उगाया जाता है. इसके पौधे ओजपूर्ण होते हैं और कम दूरी में ही फैलते हैं. इसकी गुठली में पाए जाने वाले फल का अनुपात 1:0.67 होता है. इस किस्म के फलों का रंग पीला भूरा होता है. इसके पौधे स्वअनिषेचित होते हैं. इनमें निषेचन की क्रिया के लिए नीप्लस अल्ट्रा किस्म के पौधे उत्तरदायी होते हैं.

फेसिओनेलो

बादाम की इस किस्म का पौधा ऊंचाई में अधिक जाता है. इस किस्म के पौधे पर फल सामान्य रूप से लगते हैं. इसेक पौधे की लम्बाई अधिक होते हुए भी इसकी पैदावार सामान्य रहती है.

पियरलेस

इस किस्म की प्रजाति पाले के लिए बहुत अधिक संवेदनशील है. इस किस्म का छिलका बहुत मोटा होता है. जिसके अंदर पाई जाने वाली गिरी का रंग हल्का पीला भूरा होता है. इस किस्म के पौधे भी नॉन पेरिल किस्म के लिए अच्छे परागकर्ता का काम करते हैं.

सामान्य किस्में

इस प्रजाति की किस्में सामान्य रूप से तैयार होती है. जो पकने के लिए मध्यम समय लेती हैं.

क्रिस्टोमोरटो

इस किस्म का पौधा स्वअनिषेचित होता है. जिसके फूलों को निषेचन के लिए दूसरी किस्मों के पौधे की जरूरत होती है. इस किस्म के पौधे अधिक लम्बाई वाले होते हैं. जिन पर लगने वाले फल सुगन्धित होते हैं. इसके फलों का रंग पीला भूरा दिखाई देता है. जिसका आकार अंडाकार होता है. इसके प्रत्येक फल में दो कठोर गिरी पाई जाती हैं.

वेस्ता

इस किस्म का पौधा अधिक फैला हुआ होता है. जिस पर लगने वाले फल स्वादिष्ट होते हैं. इस किस्म के पौधे और फलों पर कई तरह के कीटों का आक्रमण देखने को नही मिलता. इसके पौधे ड्रेक, मारकोनी तथा नॉन पेरिल किस्मों के लिए परागकर्ता का काम करते हैं.

मरकोना

बादाम की इस किस्म के पौधों की शाखाएं झुकी होती है, जिनकी लम्बाई अधिक होती है. इस किस्म के पौधे रोपाई के लगभग तीन साल बाद ही फल देना शुरू कर देते हैं. जिसके फलों का रंग सुखाने के बाद पीला दिखाई देते हैं.

पछेती किस्में

पछेती प्रजाति की किस्मों के पौधों पर फल अधिक मात्रा में पाए जाते हैं.

जेन्को

बादाम की पछेती किस्म

इस किस्म के पौधे भी स्वअनिषेचित पाए जाते हैं. जिनके लिए निषेचन का काम फिलिप्पो सिओ, टेक्सा और ट्यूनो किस्में करती हैं. बादाम की ये किस्म अधिक पैदावार के लिए जानी जाती है. जिसके फलों पर काफी कम रोग लगते हैं. इसके फलों का आकार अंडाकार और गोल दिखाई देता है.

टेक्सास

इस किस्म का फल पकने में ज्यादा वक्त लेते हैं. इस किस्म की गिरीयों का स्वाद हल्का कड़वापन लिए होता है. जिनका आकार छोटा दिखाई देता है. इस किस्म के पौधे पर फल देरी से पकने के कारण पाले का प्रभाव देखने को नही मिलता.

खेत की तैयारी

बादाम के पौधे एक बार लगाने के बाद लगभग 40 से 50 साल तक पैदावार देते हैं. इस कारण इसके खेतों की जुताई शुरुआत में ही एक बार की जाती है. इसके लिए खेत की शुरुआत में जुताई मिट्टी पलटने वाले हलों से करनी चाहिए. उसके बाद कल्टीवेटर चलाकर खेत की दो से तीन गहरी जुताई कर खेत में पाटा लगा दें. इससे खेत समतल दिखाई देने लगता है.

खेत के समतल हो जाने के बाद उसमें 5 से 8 मीटर की दूरी पर एक मीटर व्यास और एक से आधा मीटर गहराई के गड्डे तैयार कर लें. गड्डों के तैयार होने के बाद मिट्टी में गोबर की पुरानी खाद और उचित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों को मिलाकर उसे तैयार किये हुए गड्डों में भर दें. इन गड्डों को पौध रोपण के एक से डेढ़ महीने पहले तैयार किया जाता है.

पौध तैयार करना

बादाम के पौधे बीज और कलम के माध्यम से तैयार किये जाते हैं. बादाम के बीज के माध्यम से उगाये गए पौधे लगभग 8 साल में फल देना शुरू करते हैं. इस कारण कलम के माध्यम से तैयार किये हुए पौधे खेतों में लगाने चाहिए. कलम के माध्यम से तैयार किये हुए पौधे तीन साल बाद फल देना शुरू कर देते हैं.

इसकी पौध नर्सरी में सामान्य कलम रोपण, गूटी और ग्राफ्टिंग विधि के माध्यम से तैयार की जाती हैं. इन सभी विधियों के बारें में अधिक जानकारी आप हमारे इस आर्टिकल से ले सकते हैं.

बादाम की पौध नर्सरी में कलम से तैयार करने की अपेक्षा किसी सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त नर्सरी से खरीदकर उगाना अच्छा होता है. ऐसे करने से कम टाइम में पौधे से फल प्राप्त किये जा सकते हैं.

पौध रोपण का तरीका और टाइम

बादाम के पौधे का रोपण गड्डों के तैयार करने के लगभग एक महीने बाद किया जाता है. अगर इसके पौधे का रोपण नर्सरी से पौध खरीदकर कर रहे हों तो ध्यान रखे की हमेशा एक साल पुराने पौधे को ही नर्सरी से खरीदें. और पौधा बिलकुल स्वस्थ और कम पत्तियों और शाखाओं युक्त होना चाहिए. इन पौधों का रोपण गड्डों में एक और छोटे आकार का गड्डा तैयार कर किया जाता है.

बादाम के पौधे

गड्डों में तैयार किये गए इन छोटे गड्डों को गोमूत्र या बाविस्टिन से उपचारित कर लेना चाहिए. ताकि पौधे को अंकुरित होने में ज्यादा परेशानियों का सामना ना करना पड़े. और पौधा रोग मुक्त रहे. पौधों को गड्डों मे लगाने के बाद उसके चारों तरफ मिट्टी डालकर अच्छे से दबा दें.

बादाम के पौधे का खेतों में रोपण नवम्बर और दिसम्बर माह में किया जाता है. लेकिन नवम्बर माह में इसका रोपण करना सबसे उचित रहता है. क्योंकि इस दौरान वातावरण बादाम के पौधे के विकास के अनुकूल बना रहता है. और ये वातावरण पौधे को अधिक समय तक मिलता है, जिससे पौधा अच्छे से विकास करता है.

पौधों की सिंचाई

बादाम के पौधों को अधिक सिंचाई की जरूरत नही होती. शुरुआत में इसके पौधे को विकास करने के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है. इसके लिए शुरुआत में पौधे को गर्मियों के वक्त सप्ताह में एक बार और सर्दियों में महीने में दो बार पानी देना उचित होता है. लेकिन जब पौधा पूर्ण रूप से विकसित हो जाए तब पौधे की साल में 5 से 8 सिंचाई करना ही काफी होता है. बादाम की खेती में टपक विधि से सिंचाई करना सबसे अच्छा होता है. इसके बारें में आप हमारे इस आर्टिकल से जानकारी हासिल कर सकते हैं.

उर्वरक की मात्रा

बादाम के पौधे को बाकी पौधे की तरह ही उर्वरक की उचित मात्रा की आवश्यकता होती है. इसके लिए शुरुआत में गड्डों की तैयारी के वक्त प्रत्येक गड्डों में लगभग 20 से 25 किलो पुरानी गोबर की खाद को मिट्टी में मिलाकर भर दें. इसके अलावा एन.पी.के. की लगभग 100 ग्राम मात्रा को पौधों को साल में तीन बार देना चाहिए. शुरुआत में पौधे पर फल लगने तक उर्वरक की ये मात्रा देनी चाहिए. फल लगने के बाद उर्वरक की इस मात्रा को धीरे धीरे पौधे के विकास के अनुरूप बढ़ा देना चाहिए.

खरपतवार नियंत्रण

बादाम के पौधों में खरपतवार नियंत्रण नीलाई गुड़ाई कर किया जाता है. इसके लिए शुरुआत में पौधों की गुड़ाई पौध रोपण के लगभग 25 से 30 दिन बाद कर देनी चाहिए. उसके बाद लगभग डेढ़ महीने के अंतराल में पौधों की एक बार गुड़ाई करनी चाहिए. जब पौधा पूरी तरह से विकसित हो जाये तब पौधे की साल में तीन से चार गुड़ाई करना उचित होता है.

बादाम के पौधों का रोपण 5 से 8 मीटर की दूरी पर किया जाता है. जिस कारण बीच में बची हुई जमीन अगर खाली हो तो बारिश के मौसम के बाद जमीन के सूखने पर उसकी जुताई कर देनी चाहिए. ताकि खेती में कोई खरपतवार जन्म ना ले पायें.

अतिरक्त कमाई

बादाम के पौधों की रोपाई 5 से 8 मीटर की दूरी पर की जाती है. और इसके पौधे तीन से चार साल बाद पैदावार देना शुरू करते हैं. इस दौरान इसके पौधों के बीच बची शेष जमीन में सब्जी और मसाले फसलों को उगाकर अच्छी खासी कमाई की जा सकती है. जिससे किसान भाइयों को आर्थिक परेशानियों का सामना भी नही करना पड़ेगा.

पौधों में लगने वाले रोग और उनकी रोकथाम

बादाम के पौधे पर कई तरह के रोग देखने को मिलते हैं, जो पौधे को कई तरह से नुक्सान पहुँचाकर पैदावार को कम करते हैं. जिनकी टाइम रहते रोकथाम करना उचित होता है.

पत्ती धब्बा

बादाम के पौधे पर पट्टी धब्बे का रोग उसकी विकास की अवस्था में देखने को मिलता है. इस रोग के लगने पर पत्तियों पर गहरे भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं. ये धब्बे धीरे धीरे बड़े होकर पत्तियों को नष्ट कर देते हैं. इस रोग की रोकथाम के लिए पौधों पर थिरम का छिडकाव करना चाहिए.

जड़ सड़न

जड़ सडन का रोग ज्यादातर बारिश के मौसम में होने वाले जलभराव की वजह से देखने को मिलता है. इस रोग के लगने पर पौधे की पत्तियां मुरझा जाती है और पौधा जल्दी ही सूखने लगता है. इस रोग की रोकथाम के लिए खेत में जल भराव ना होने दे. साथ ही पौधों की जड़ों में बोर्डो मिश्रण का छिडकाव करना चाहिए.

कीटों का आक्रमण

रोग ग्रस्त बादाम

बादाम के पौधे पर कीटों के आक्रमण का प्रभाव पौधे की पत्तियों और नई शाखाओं पर देखने को मिलता है. ये किट पौधे की पत्तियों और शाखाओं को खाकर पौधे के विकास को रोक देते हैं. इनकी रोकथाम के लिये पौधों पर डरमेट की उचित मात्रा का छिडकाव करना चाहिए.

फलों की तुड़ाई

बादाम के फलों की तुड़ाई उनके पूर्ण रूप से पकने के बाद पतझड़ के मौसम में की जाती है. बादाम के पौधे रोपाई के 5 से 7 साल बाद पूर्ण रूप से पैदावार देना शुरू कर देते हैं. बादाम के फल फूल लगने के लगभग 8 महीने बाद पककर तैयार हो जाते हैं. बादाम की गुठलियों का रंग जब हरे से पीले में बदल जाए और गुठलियाँ टूटकर नीचे गिरने लगे तब फलों की तुड़ाई कर लेनी चाहिए.

फलों की तुड़ाई के बाद उन्हें छायादार जगह में सुखाया जाता है. जब गुठलियाँ पूरी तरह से सुख जाए तब उन्हें फोड़कर उनसे बादाम गिरी निकल ली जाती है.

पैदावार और लाभ

बादाम की अलग लग किस्मों को अलग अलग पैदावार होती है. जिनका बाज़ार में किसान भाइयों को अच्छा ख़ासा भाव मिल जाता है. जिससे किसान भाइयों की एक बार में अच्छी खासी कमाई हो जाती है.

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