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मचान विधि क्या है – मचान विधि से खेती कैसे करे

वर्तमान की इस दुनिया में हर कोई आगे बढ़ना चाहता है. जिसकी वजह से नई नई तकनीकियों का विकास हो रहा है. इन तकनीकियों का विकास हर क्षेत्र में देखने को मिल रहा है. उन्ही में से एक क्षेत्र कृषि का भी है. जिसमें कृषि वैज्ञानिकों की वजह से वर्तमान में खेती की कई तकनीकियों का विकास हुआ है. जिसमें सिंचाई पद्धति, उन्नत किस्म के बीज, पौध रोपाई के तरीके, खेती के संसाधन और खेती करने के तरीकों में परिवर्तन शामिल हैं.

मचान विधि से खेती

इंटरनेट की इस दुनिया में समय के साथ साथ खेती करने के तरीकों में भी काफी परिवर्तन होने लगा है. इन बदलते तरीकों की वजह से ही पौधों से मिलने वाली पैदावार में भी इजाफा देखने को मिल रहा है. आज हम लतादार फसलों को उगाने की एक ऐसी ही विधि के बारें में बताने वाले हैं. जिसका इस्तेमाल कर किसान भाई अपनी पैदावार को बढ़ा सकते है. जिससे लतादार फसलों से अधिक मुनाफा मिलता है.

हम जिस विधि के बारें में बात करने वाले हैं उसका नाम मचान विधि है. जिसके माध्यम से किसान भाई लता (बेल) वाली फसलों को उगाकर अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकता है.

मचान विधि क्या है ?

मचान विधि फसलों को तैयार करने की एक उत्तम विधि है. इस विधि में फसल जमीन की सतह पर ना फैलकर तार और रस्सियों के सहारे खुले वातावरण में फेलकर विकास करते हैं. जिससे फसलों में कई तरह के रोग नही लगते और फसल से अधिक उत्पादन प्राप्त होता है.

मचान विधि से खेत खेती करें ?

मचान विधि से खेती करने के लिए कई तरह से तैयारी की जाती है. इस विधि से खेती करने पर कई तरह के लाभ देखने को मिलते हैं. जिस कारण किसान भाइयों को अपनी फसल से अधिक आमदनी प्राप्त होती है. इस विधि से खेती करने के लिए कई पहलुओं का ध्यान रखना पड़ता है.

खेत की तैयारी

मचान विधि से खेती करने के लिए सबसे पहले खेत की तैयारी की जाती है. जिसमे शुरुआत में खेत की गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लिया जाता है. उसके बाद खेत में मेड तैयार की जाती है. इन मेड़ों का आकार विभिन्न फसलों के लिए अलग अलग रखा जाता है. मेड तैयार करने के लिए पावर टिलर या विशेष प्रकार के हलों का इस्तेमाल किसान भाई कर सकते हैं. मेड तैयार होने के बाद मेड पर पौधों की सिंचाई के लिए ड्रिप को बिछाया जाता है.

पॉलीथीन बिछाना

इसका इस्तेमाल किसान भाइयों की मर्जी के आधार पर आधारित होता है. ड्रिप बिछाने के बाद मेड को  पॉलीथीन बिछाकर ढक दिया जाता है. इसको बिछाने के लिए वर्तमान में कई तरह की मशीनें बाज़ार में उपलब्ध है. लेकिन जो भाई मशीनों का इस्तेमाल नही कर सकता वो इसे खुद भी बिछा सकता है. इसमें अधिक मेहनत और समय लगता है. पॉलीथीन बिछाने के बाद उसके दोनों तरफ मिट्टी डालकर दबा दिया जाता है. इससे खेत में खरपतवार कम जन्म लेती है. वर्तमान में बाज़ार में कई तरह की पॉलीथीन उपलब्ध है.

पौधों की रोपाई

पॉलीथीन बिछाने के बाद उसमें पौध रोपाई की जाती है. इसके लिए पॉलीथीन में जिक जेक तरीके से छिद्र बनाए जाते हैं. जिनकी दूरी फसल के आधार पर रखी जाती है. उसके बाद छिद्रों में उर्वरक की उचित मात्रा डालकर पौधों की रोपाई की जाती है. रोपाई के लिए खुरपी के माध्यम से हल्का गड्डा तैयार किया जाता है. जिसमें पौध या बीज लगाने के बाद अच्छे से मिट्टी से दबा दिया जाता है.

मचान तैयार करना

मचान तैयार करने के लिए मेड पर बांस या लोहे के खम्भे गाड़े जाते हैं. इन बांस और लोहे के खम्भों के बीच चार मीटर के आसपास दूरी होनी चाहिये. जिन पर रस्सी या तार का जल तैयार किया जाता है. इन तार और रस्सियों को बांधते वक्त इन्हें अच्छी तरह बंधना चाहिए. ताकि वजन बढ़ने पर ये टूट नही पायें. इन तार और रस्सियों की ऊंचाई जमीन की सतह से डेढ़ से दो फिट के आसपास रखते हैं. उसके बाद जब पौधा विकास करने लगता है तब उन्हें रस्सी और तार से बनाए गए जाल पर चढ़ा देते है.

लतादार फ़सलें तो ऊपर मचान में रहेगी उसके साथ किसान भाई ज़मीन पर प्याज़ जैसी कम समय समय और  छोटे कंद  वाली फ़सल ले सकते है।

मचान विधि के लाभ

मचान विधि से खेती करने के कई लाभ है. जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दिखाई देते हैं.

  1. मचान विधि से खेती करने से पौधों में कई तरह के रोग नही लग पाते, जिनकी वजह से पैदावार अधिक प्राप्त होती है.
  2. मचान विधि से खेती करने पर दो फ़सल में  उर्वरक की मात्रा का कम इस्तेमाल होता है. जिससे उर्वरक पर होने वाला खर्च बच जाता है. और उर्वरक का उचित इस्तेमाल होता है.
  3. मचान विधि का सबसे बड़ा लाभ फसल की पैदावार से होता है. इस विधि से खेती करने से पर पैदावार 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है.
  4. इस विधि से खेती करने पर पौधों को सिंचाई की कम आवश्यकता होती है. जिससे गिरते भू-जल स्तर में कमी देखने को मिलती है.
  5. इस विधि से खेती करने पर खेत में पॉलीथीन लगाने पर खरपतवार कम पैदा होती है. जिससे पौधों को पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं.
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