जैविक खेती

जैविक खेती क्या है – कैसे करें और इसके फायदे!

जब भारत को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद भी अनाज के लिए दूसरे देशों पर निर्भर होना पड़ता था. उस दौरान हरित क्रांति का उदय हुआ जिसका उद्देश्य देश को अनाज और कृषि आधारित चीजों में आत्मनिर्भर बनाना था. और उस दौरान अधिक उपज लेने के लिए देश के किसानों को रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल के बारें में बताया गया.

जैविक खेती

जिसके बाद देश के अधिकतर किसान भाई अधिक पैदावार लेने के लिए रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल करने लगे. इनको इस्तेमाल करने से खेत से अधिक मात्रा में उपज प्राप्त होने लगी. जिसके बाद धीरे धीरे इन रासायनिक चीज़ों को हर किसान ने अपना लिया. लेकिन इनके अत्यधिक इस्तेमाल की वजह से वर्तमान में भूमि की पैदावार स्थिर हो चुकी है. क्योंकि भूमि अपनी उर्वरक शक्ति खो चुकी है. ऐसे में अब जैविक खेती की जरूरत होने लगी है.

आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से जैविक खेती के लिए आवश्यक चीजों और इसके फायदे और नुक्सान के बारें में बताने वाले हैं.

जैविक खेती क्या है

जैविक खेती वो खेती है जो संश्लेषित रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशियों के इस्तेमाल के बिना की जाती है. जैविक खेती भूमि की उर्वरक शक्ति को बढ़ाती है. जैविक खेती को पुराने तरीके की खेती भी बोल सकते हैं. जिसे प्राचीन काल में किसान किया करते थे.

जैविक खेती क्यों आवश्यक है

जैविक खेती पूरी तरह से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के इस्तेमाल के बिना की जाती है. जिस कारण जैविक खेती के उत्पादों में किसी भी तरह के रासायनिक पदार्थों का गुण नहीं पाया जाता. इस कारण इसके उत्पाद मानव शरीर के लिए बहुत अच्छे होते हैं. और खाने में भी स्वादिष्ट होते हैं. वर्तमान में जैविक उत्पादों की मांग बढती जा रही है. जिससे किसान भाइयों को उनकी फसलों की कीमत ज्यादा मिलने लगी है.

जैविक तरीके से खेती करने वाले किसान भाइयों का फसल की सुरक्षा पर होने वाला खर्च भी कम होता है. और उत्पाद भी अधिक प्राप्त होता है. रसायानिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से अपनी उर्वरक शक्ति खो चुकी भूमि में जैविक खेती करने से उसकी उर्वरक क्षमता में भी विकास होने लगता है. जिससे पौधों में रोगों से लड़ने की शक्ति बढती है.

जैविक खेती के लिए सरकारी योजना

वर्तमान में भारत सरकार द्वारा जैविक खेती की तरह ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है. ताकि किसान भाइयों की आमदनी ज्यादा हो सके. इसके लिए सरकार द्वारा परम्परागत कृषि विकास योजना चलाई जा रही है. जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आय को दोगुना करना हैं.

जैविक खेती के लिए आवश्यक चीजें

जैविक खेती करने के लिए भी रासायनिक खाद और कीटनाशकों की तरह जैविक खाद और कीटनाशकों की जरूरत होती है. जो कई तरह के होते हैं. जिन्हें जैविक चीजों के माध्यम से तैयार किया गया है.

जैविक खाद

जैविक खाद को किसान भाई अपने घर पर भी तैयार कर सकते हैं. इसको तैयार करने के लिए किसी भी तरह के किसी रसायन या मशीनों की जरूरत नही होती ये पूरी तरह प्राकृतिक होता है.

गोबर खाद

जैविक खादों को बनाने का ये एक मुख्य घटक है. गोबर की खाद का इस्तेमाल तो लगभग सभी किसान भाई करते हैं. लेकिन इसको एक खास प्रक्रिया के माध्यम से और भी अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है. जिससे इसकी गुणवत्ता में वृद्धि हो जाती है. इसके लिए गोबर को किसी निश्चित आकार के गड्डों में भर दिया जाता है. उसके बाद गोबर को भरकर तैयार किये गए इन गड्डों में गर्मियों के मौसम में हल्का पानी छोड़ते रहना चाहिए. ताकि गोबर सूखकर ख़राब न हो पाए. पानी देने से खाद की गर्मी कम हो जाती है. और खाद काला पड़कर ज्यादा उर्वरक क्षमता वाला बन जाता है. जिसको किसान भाई खेतों में जमीन खाली होने पर डाल सकते हैं.

केंचुआ खाद

जैविक खाद

केंचुआ खाद को वर्मी कम्पोस्ट के नाम से भी जाना जाता है. जिसे गोबर और सड़ी गली गोबर की चीजों से बनाया जाता है. इसको तैयार करने के लिए गोबर के साथ बाकी जैविक चीजों के मिश्रण को आपस में अच्छे से मिलाकर प्लास्टिक बैगों में भर दिया जाता है. उसके बाद इन बैगों में केंचुओं को छोड़ दिया जाता है. जो इसको गोबर को खाकर खाद तैयार करते हैं. केंचुआ के द्वारा तैयार इस वर्मी कम्पोस्ट खाद की गुणवत्ता गोबर खाद से ज्यादा अच्छी होती है. जिसे किसान भाई अपने घर पर भी तैयार कर सकता है. इसके इस्तेमाल से मिट्टी की जल धारण क्षमता में वृद्धि होती है. और मिट्टी की उर्वरक शक्ति भी बढ़ जाती है. इसके अलावा फसलों पर दीमक का प्रकोप भी बहुत कम देखने को मिलता है.

कम्पोस्ट खाद

कम्पोस्ट खाद फसलों और सब्जियों के अवशेषों को गोबर के साथ मिलाने के बाद उन्हें सड़ाकर बनाया जाता है. इसको बनाने के लिए सब्जियों या किसी भी तरह के जैविक अपशिष्ट को गोबर में मिलाकर उसमें हलकी मिट्टी डालर कुछ वक्त के लिए गड्डों में भरकर सडा दिया जाता है. और जब इनका मिश्रण पूरी तरह विघटित हो जाता है. तब ये खाद के रूप में बनकर तैयार हो जाती है. इस तरह तैयार कम्पोस्ट खाद की गुणवत्ता अच्छी होती है. जिसका ज्यादा इस्तेमाल बागबानी फसलों में किया जाता है.

हरी खाद

हरी खाद दलहनी और फली वाली फसलों से तैयार की जाती है. इसको तैयार करने के लिए फली वाली फसलों को खेत में उगा दिया जाता है. उसके बाद जब पौधों लगभग 50 दिन का हो जाता तब उसे खेत में हलों की मदद से काटकर मिट्टी में मिला दिया जाता हैं. हरी खाद मिट्टी में नाइट्रोजन की पूर्ति करती है. जिससे खेत की उर्वरक क्षमता बढ़ जाती है.

खली की खाद

खली की खाद पौधों के लिए बहुत ही ज्यादा उपयोगी होती है. खली की खाद के इस्तेमाल से मिट्टी में पनपने वाले खतरनाक किट भी नष्ट हो जाते हैं. खली की खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ जाती है. खली की खाद गोबर और जैविक अपशिष्ट को खली के साथ मिलाकर बनाई जाती है. इसके लिए तिलहन फसलों के दानो से तेल निकालने के बाद शेष बचे अपशिष्ट जिसे खली बोला जाता है. उसे गोबर और जैविक अपशिष्ट के साथ मिलाने के बाद सडाकर तैयार किया जाता है.

जैविक कीटनाशक

जैविक कीटनाशक कुछ पौधों की पत्तियों और पशुओं के अपशिष्टों को मिलकर बनाए जाते हैं.

नीम का तेल

नीम के तेल का इस्तेमाल कीटनाशक के रूप में किया जाता है. इसका इस्तेमाल करने से की तरह के किट रोगों से छुटकारा मिलता है. नीम के तेल में रीठा मिलाकर छिड़कने से कई तरह के जीवाणु रोग नही लगते. एक एकड़ में लगभग तीन किलो नीम का तेल काफी होता है.

पंचगव्य

पंचगव्य को गाय के अपशिष्ट के माध्यम से तैयार किया जाता है. इसके लिए गाय के घी, मूत्र, गोबर और दूध को शहद में उचित मात्रा में मिलाकर एक मिश्रण तैयार किया जाता है. इसके इस्तेमाल के लिए तैयार किये गए इसके मिश्रण को 1:10 के अनुपात में पानी में मिलाकर पौधों पर छिडकना चाहिए. इससे पौधों में कई तरह की बीमारियों और कीटों से छुटकारा मिलता है.

नीम का काढ़ा

नीम के काढ़े का इस्तेमाल कई तरह के किट और जीवाणु जनित रोगों में किया जाता है. इसके लिए नीम की पत्तियों को गुड के साथ मिलकर पानी में डालकर उबाल ले. उसके बाद इस पानी को छानकर उसमें रीठा की उचित मात्रा को मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें. जिसे उचित मात्रा में पानी में मिलाकर पौधों पर छिड़क दें.

इनके अलावा और भी कई तरह के जैविक कीटनाशक हैं. जिन्हें किसान भाई अपने घर पर बना सकते हैं. इनमें जीवामृत, घनजीवामृत जैसे कई रसायन है.

जैविक खेती के लाभ

जैविक खेत के कई तरह के लाभ हैं. जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दिखाई देते हैं.

प्रत्यक्ष लाभ

  1. इससे रासायनिक खाद पर निर्भरता में कमी होती है. जिससे खेती पर खर्च कम होता है.
  2. फसल के उत्पादन में वृद्धि देखने को मिलती है.
  3. बाज़ार में लगातार बढ़ रही जैविक उत्पादों की मांग की वजह से किसानों को उनकी फसल के अधिक दाम मिलते है. जिससे उनकी आय बढती है.
  4. कचरे का इस्तेमाल खाद बनाने में करने से कचरा कम फैलता है. जिससे बीमारियाँ कम होती है.
  5. जैविक चीजों के इस्तेमाल करने का सबसे बड़ा फायदा पर्यावरण प्रदूषण कम होता है.

अप्रत्यक्ष लाभ

  1. इसके इस्तेमाल से ना केवल भूमि की उर्वरक शक्ति बनी रहती है बल्कि उसमें वृद्धि भी देखने को मिलती है.
  2. खेत में नमी की मात्रा बढ़ने से पौधों के सिंचाई अंतराल में वृद्धि होती है. जिससे जल का संरक्षण होता है.
  3. भूमि से पानी का वाष्पीकरण कम होने की वजह से जल स्तर में हो रही गिरावट कम हो जाती है.
  4. जैविक खेती से प्राप्त उत्पाद मनुष्य शरीर के अच्छे होते हैं.
  5. जैविक खेती करने से अपशिष्टों को नष्ट करने की जरूरत नही पड़ती. उन्हें खेतों में उपयोग में लिया जा सकता है.
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