चन्दन की खेती कैसे करें – पूरी जानकारी!!

चन्दन की कीमत बाज़ार में सोनी की तरह है. इसकी खेती 12 से 15 साल बाद पैदावार देती है. चन्दन के पौधे की लम्बाई 20 मीटर तक जा सकती है. इसके पौधे के सभी भागों का इस्तेमाल किया जाता है. इसका पौधा जितना पुराना होता है, इसमें उतनी ही तेल की मात्रा बढती जाती है. चन्दन की खेती पर कई राज्यों में बैन लगाया गया है. इसकी खेती के लिए कानूनी मान्यता जरूरी है.

चन्दन का व्यापारिक इस्तेमाल इत्र, धूप औषधि और सौंदर्य प्रसाधन जैसी बहुत सारी चीजों को बनाने में किया जाता है. भारत में चन्दन का इस्तेमाल प्राचीन काल से शुभ कार्यों में हवन के समय किया जाता रहा है. चन्दन की खेती ज्यादातर दक्षिण भारत में की जाती है. कर्नाटक के जंगलों में इसका पौधा आसानी से मिल जाता है.

चन्दन की खेती

चन्दन की खेती के लिए उच्च उर्वरक क्षमता वाली उपजाऊ जमीन की जरूरत होती है. और इसकी खेती के लिए 500 से लेकर 625 मिमी. बारिश की जरूरत होती है. चन्दन के पौधे को शुष्क और आद्र जलवायु की जरूरत होती है. दक्षिण भारत के राज्यों के अलावा भारत में इसकी पैदावार के लिए राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की जलवायु भी उचित मानी जाती है. चन्दन के पौधे के लिए सामान्य से थोडा ज्यादा तापमान सही होता है.

अगर आप भी चन्दन की खेती कर अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो आज हम आपको इसके बारें में सम्पूर्ण जानकारी देने वाले हैं.

उपयुक्त मिट्टी

चन्दन की खेती के लिए उचित जल निकासी वाली काली चिकनी मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है. लेकिन इसकी खेती पथरीली और लाल चिकनी बलुई मिट्टी में भी की जा सकती है. इसकी खेती के लिए जमीन का पी.एच. मान 7 से 8.5 होना चाहिए. इसकी खेती के लिए जलोढ़ और नम मिट्टी उपयुक्त नही होती. जलोढ़ मिट्टी में इसकी खेती करने से पौधे में तेल की मात्रा बहुत कम पाई जाती है.

जलवायु और तापमान

चन्दन की खेती के लिए शुष्क जलवायु की जरूरत होती है. इसके पौधे को ज्यादा सर्दी के मौसम की जरूरत नही होती. सर्दियों में पड़ने वाला पाला इसके लिए उचित नही होता. इसकी खेती के लिए 500 से लेकर 625 मिमी. वर्ष काफी होती है. इसके पौधे को गर्मियों में ज्यादा सिंचाई की जरूरत होती है. इसके पौधे की जड़ें दूसरे पौधे से अपने लिए आवश्यक तत्व हासिल करती हैं.

चन्दन के पौधे के लिए अधिक निम्न तापमान अच्छा नही होता है. इसके पौधे को विकास करने के लिए 15 से 35 डिग्री तापमान सबसे उपयुक्त होता है. लेकिन 35 डिग्री से ज्यादा तापमान को भी ये सहन कर लेता है. इसके पौधे को धूप की अधिक जरूरत होती है.

उन्नत किस्में

चन्दन की दुनियाभर में कई किस्में हैं, लेकिन भारत में इसकी दो किस्में ही पाई जाती हैं. जिन्हें सफ़ेद और लाल चन्दन के नाम से जाना जाता है.

लाल चन्दन

लाल चन्दन का पौधा

लाल चन्दन को रक्त चन्दन के नाम से भी जाना जाता है. लाल चन्दन के पौधे से सफ़ेद चन्दन की तरह महक ( खुशबु ) नही आती. इसका इस्तेमाल इत्र, हवन सामग्री, दवाई और महंगी सजावटी चीज़े बनाने में किया जाता है. इसका पौधा मुख्य रूप से तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश प्रदेश के कुछ जिलों में पाया जाता है. इसके पौधे की लम्बाई सफ़ेद चन्दन के पौधे से कम पाई जाती हैं.

सफ़ेद चन्दन

सफ़ेद चन्दन की लकड़ियों का रंग सफ़ेद होता हैं. इसका व्यापारिक इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है. सफ़ेद चन्दन की लकड़ियों में महक ( खुशबु ) अधिक आती है. सफेद चन्दन की लकड़ी लाल चन्दन से महँगी होती है. सफ़ेद चन्दन का इस्तेमाल साबुन, तेज़, पाउडर, औषधी, इत्र और चन्दन तेल जैसी बहुत सारी महँगी चीजें बनाने में किया जाता है. इसका पौधा 15 मीटर से ज्यादा लम्बा जा सकता है.

खेत की जुताई

चन्दन की खेती के लिए खेत की पहले अच्छे से जुताई कर उसमें से पुरानी फसलों के सभी अवशेष ख़तम कर दें. चन्दन के पौधों को गड्डों में लगाया जाता है. इसके लिए खेत में 10 फिट की दूरी पर 2 फिट गहरे और चार से पांच फिट चोडाई के गड्डे तैयार कर लें. इन गड्डों में पुरानी गोबर की खाद को मिट्टी में मिलकर छोड़ दें. गोबर की खाद की जगह जैविक या कम्पोस्ट खाद का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

चन्दन के पौधों को किसी भी तरह के रासायनिक खाद की जरूरत नही होती. चन्दन का पौधा ज्यादातर अपने लिए पोषक तत्व दूसरे पौधों से ही हासिल करता है. इस कारण इसके पौधे को उर्वरक की ज्यादा जरूरत भी नही होती. इसका पौधा नीम, सिरीस, हरड, नागफनी के पौधे से अपने लिए भोज़न, पानी, खनिज तत्व ग्रहण ज्यादा करता है. इसलिए चन्दन की खेती करते वक्त चन्दन के पौधे के पास इन पौधों को जरुर लगा दें.

पौधे की रोपाई

चन्दन के पौधे

चन्दन के पौधे को बीज और पौध के रूप में उगाया जाता है. इसके लिए सरकारी नर्सरी से इनके पौधों को खरीद सकते हैं. जिसके लिए पहले आवेदन करना होता है. पौधे या बीज आने के बाद उन्हें खेत में बनाए गड्डों में लगा दें. चन्दन की खेती के लिए खेत के चुनाव के वक्त ध्यान रखे की खेत छायादार जगह पर नही होना चाहिए.

चन्दन की खेती के लिए पौधे लगाना सबसे उपयुक्त होता है. लेकिन अगर बीज से इसके पौधों को लगाते हैं तो इसके अंकुरण में दो महीने से भी ज्यादा का वक्त लग सकता है. इसके पौधों को बारिश के मौसम से पहले या बारिश के मौसम में लगाना चाहिए. बारिश के मौसम में इसके पौधे अच्छे से विकास करते हैं.

पौधे की सिंचाई

चन्दन के पौधे को सिंचाई की ज्यादा जरूरत होती है. बारिश के मौसम में इसके पौधे को सिंचाई की जरूरत नही होती. जबकि गर्मी के मौसम में इसके पौधे में नमी की मात्रा बनाए रखने के लिए दो से तीन दिन के अंतराल में पानी देते रहना चाहिए. और सर्दी के मौसम में इसके पौधों को सप्ताह में एक बार पानी देना चाहिए.

सहायक फसलें

चन्दन के पौधे को एक बार खेत में लगाने के बाद 12 से 15 साल बाद उखाडा जाता हैं. इसलिए तब तक किसान भाई चन्दन के पौधों के बीच में बची जमीन में दलहन या बागबानी फसल उगाकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं. जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना भी नही करना पड़ेगा.

उर्वरक की मात्रा

चन्दन के पौधों को उर्वरक की काफी कम जरूरत होती हैं. शुरुआत के इसके पौधों को गड्डों में लगाने के वक्त गड्डों में 5 से 10 किलो गोबर की खाद पर्याप्त होती है. खाद की ये मात्रा पौधों को साल में दो बार देना उचित होता है. इसकी खेती के लिए रासायनिक खादों का इस्तेमाल नही करना चाहिए.

खरपतवार नियंत्रण

चन्दन के पौधों को शुरूआती साल में खरपतवार नियंत्रण की ज्यादा जरूरत होती है. इसलिए शुरुआत में जब भी इसके पौधे के पास खरपतवार दिखाई दें तो उसे पौधे की नीलाई गुड़ाई कर निकाल देनी चाहिए. इसके अलावा खेत में किसी भी तरह के जंगली पौधे को ना उगने दे.

पौधे में लगने वाले रोग और उनकी रोकथाम

चन्दन के पौधे पर लगने वाला सैंडल स्पाइक नामक रहस्यपूर्ण और संक्रामक वानस्पतिक रोग सबसे खतरनाक हैं. अभी तक इस रोग की रोकथाम के लिए कोई भी उपाय कारगर साबित नही हो पाया है. इस रोग के लगने पर पौधे की पत्तियां ऐंठकर छोटी हो जाती हैं. और पौधा भी विकृत आकृति धारण कर लेता है.

चन्दन के पौधों को रोगों से बचने के लिए ही इसके पौधों के पास नीम के पौधे लगाये जाते हैं. जिनसे चन्दन के पौधों को भोजन भी मिलता है और पौधे को रोग भी नही लगता है.

पौधे की कटाई

चन्दन का पौधा लगाने के बाद लगभग 12 से 15 साल बाद तैयार होता है. इसका पेड़ जितना पुराना होता है उतना ही ज्यादा लाभदायक होता है. इसके पेड़ को काटा नही जाता बल्कि सीधा उखाड़ा जाता है. जिसके बाद इसकी लकड़ियों को गुणवत्ता के आधार पर काटकर अलग किया जाता है.

चन्दन की कटाई के लिए सरकार से परमिशन की जरुरत होती है. सरकारी कर्मचारी की देखरेख में ही इसकी कटाई की जाती है. अगर आपका पेड़ चोरी हो जाता है तो आपको इसकी पुलिस में शिकायत करनी पड़ती है.

पैदावर और लाभ

चन्दन की लकड़ी

चन्दन की खेती ज्यादा समय की होती है. लेकिन इससे किसान भाई की आमदनी सबसे ज्यादा होती है. इसके एक पेड से लगभग 20 से 30 किलो लकड़ी प्राप्त हो जाती है. इसकी लकड़ियों का बाज़ार भाव 6 से 12 हजार प्रति किलो होता है. और एक एकड़ में लगभग 400 पौधे लगाए जा सकते हैं. अगर एक पेड़ की लकड़ी का वजन 20 किलो भी हो तो एक पेड की 12 से 15 साल बाद कीमत 1 से 2 लाख तक हो सकती है. जबकि एक एकड़ में 400 पौधे लगाये जाते हैं, जिनकी कुल कीमत 5 से 8 करोड़ तक हो सकती है.

 

1 thought on “चन्दन की खेती कैसे करें – पूरी जानकारी!!”

  1. Kya iski kheti uttar pradesh me kar skte h. Mai bhut dino se soch rha hu iski kheti karne ke liye. Iski vyaparik kheti kaise hoti h gov.se kaise permission kaise milti h kya aap hme puri jankari de skte h . Aur iske ped kha se late h aur isnki selling kaise ki jati.
    Please hme btaye ya call kre mera mobile number 9005449167

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